प्रयागराज: लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने और न्यायालय पहुंचने में जजों को हुई परेशानी के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने जलभराव की गंभीर स्थिति पर नाराजगी जताते हुए प्रयागराज के जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
अग्रिम इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने अधिकारियों से पूछा है कि शहर के निचले इलाकों समेत अन्य हिस्सों में जलभराव रोकने के लिए समय रहते आवश्यक इंतजाम क्यों नहीं किए गए। अदालत ने नगर विकास विभाग के सचिव से भी शुक्रवार तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
अदालत ने सचिव से यह बताने को कहा है कि लगातार बारिश की स्थिति में प्रयागराज शहर को जलभराव से बचाने के लिए कौन-कौन सी योजनाएं स्वीकृत हैं और उनके जरिए आम जनजीवन तथा व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित होने से कैसे रोका जाना है।
जलभराव से न्यायिक कार्य प्रभावित होने पर कोर्ट सख्त
हाईकोर्ट ने कहा कि जलभराव के कारण न्यायाधीशों को न्यायालय पहुंचने में कठिनाई हुई और न्यायिक कार्यवाही में देरी हुई। अदालत ने इसे न्याय प्रशासन में सीधे हस्तक्षेप जैसा गंभीर विषय माना।
हाईकोर्ट बार के पूर्व अध्यक्ष अमरेंद्र नाथ सिंह, पूर्व महासचिव नितिन शर्मा समेत कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी अदालत को शहर की स्थिति से अवगत कराया। अधिवक्ताओं ने बताया कि प्रशासन, नगर निगम और विकास प्राधिकरण की व्यवस्थाओं की वजह से शहर के हजारों घरों में पानी घुस गया है। जलभराव के कारण अधिवक्ताओं और वादकारियों के न्यायालय नहीं पहुंच पाने से न्यायिक कार्य भी प्रभावित हुआ।
महाधिवक्ता को अगली सुनवाई में कोर्ट की मदद का निर्देश
खंडपीठ ने प्रदेश के महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र और अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी को अगली सुनवाई में अदालत की सहायता करने का निर्देश दिया है। साथ ही रजिस्ट्रार कम्प्लायंस को आदेश की प्रति संबंधित सभी वरिष्ठ अधिकारियों को भेजकर मामले की जानकारी देने के लिए कहा गया है।
बारिश के बाद जलनिकासी व्यवस्था पर उठे सवाल
महाकुंभ के बाद विकास कार्यों को लेकर चर्चा में रहे प्रयागराज में कुछ दिनों की बारिश के बाद जलनिकासी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के कई हिस्सों में जलभराव की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर लोगों ने सवाल उठाए हैं। नेताओं ने भी जलभराव को लेकर सरकार और स्थानीय प्रशासन पर निशाना साधा है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जलभराव को लेकर सरकार पर तंज कसा। उन्होंने महाकुंभ के नाम पर प्रयागराज में विकास के लिए खर्च किए गए धन का जिक्र करते हुए इसे कथित भ्रष्टाचार से जोड़ा। अखिलेश ने जलभराव को लेकर प्रयागराज के नाम पर भी कटाक्ष किया।
अखिलेश यादव ने इससे पहले भी प्रयागराज में जलभराव को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि सरकार के कथित महापाप की पोल कभी धार्मिक तो कभी प्राकृतिक रूप से खुल रही है।
‘ट्रिपल इंजन की सरकार में आधा प्रयागराज डूबा’
प्रयागराज के सांसद उज्जवल रमण सिंह ने भी शहर में जलभराव को लेकर भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी बारिश में आधा शहर डूब गया और लोगों के घरों में पानी भर गया। उनके मुताबिक इससे सरकारी योजनाओं और जलनिकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आ गई है।
सांसद ने कहा कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत जनता से मिले टैक्स के हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन अधिकारियों की अदूरदर्शिता के कारण इसका वास्तविक फायदा लोगों को नहीं मिल सका। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर के कई मोहल्ले आज भी थोड़ी बारिश में जलमग्न हो जाते हैं।
उज्जवल रमण सिंह ने कहा कि गांवों में जलनिकासी के लिए जरूरी खोदाई नहीं हुई और शहर के नालों की पर्याप्त सफाई भी नहीं कराई गई। उनके मुताबिक इसी वजह से शहर से लेकर गांव तक जलभराव की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ट्रिपल इंजन की सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है और कई योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी साबित नहीं हुईं।
सभी नालों की सफाई का महापौर का दावा
जलभराव को लेकर प्रयागराज के महापौर गणेश केसरवानी ने कहा कि इस वर्ष शहर के सभी नालों की सफाई कराई गई है। उन्होंने स्वयं नालों की सफाई का निरीक्षण करने की बात कही। महापौर के मुताबिक नए नालों का निर्माण भी कराया गया है और सभी पंपिंग स्टेशन ठीक तरह से काम कर रहे हैं।
महापौर ने कहा कि अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जलनिकासी व्यवस्था में किसी तरह की बाधा न आने दी जाए। जलभराव वाले क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए हैं।
